April 5, 2025 6:41 pm

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फिलीपींस के आसमान में जलकर खाक हुआ एस्टेरायड, धरती के लिए बन सकते हैं बड़ा खतरा

फिलीपींस के आसमान में बुधवार को गिरा क्षुद्रग्रह (एस्टेरायड) जलकर खाक हो गया। इसका आकार एक मीटर का था, यदि यह बड़ा होता तो अप्रिय घटना हो सकती थी।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के वरिष्ठ खगोल विज्ञानी डा शशिभूषण पांडेय ने बताया कि क्षुद्रग्रहों से सतर्कता बेहद जरूरी है। इन्हें पृथ्वी के लिए खतरनाक माना जाता है।

फिलीपींस के आसमान में वातावरण से टकराया क्षुद्रग्रह छोटे आकार का था, यदि दस मीटर से बड़ा होता तो बड़ी घटना को अंजाम दे सकता था। यह लूजोन द्वीप के समीप पश्चिमी प्रशांत महासागर के आसमान में में पृथ्वी के वातावरण के संपर्क में आते ही जलकर नष्ट हो गया।

आसमान में जलते आग के गोले को नासा की कैटालिना स्काई सर्वे ने कैमरे में कैद किया है। इसके पृथ्वी के करीब आने का पता चल चुका था। इस क्षुद्रग्रह को 2024 आरडब्लू-वन नाम दिया गया है। नासा की एस्टेरायड वाच वेबसाइट ने इसके गिरने की भविष्यवाणी कर दी थी।

बड़े खतरे हैं धरती के लिए क्षुद्रग्रह

डा. शशिभूषण पांडेय के अनुसार डायनासोर का अस्तित्व धरती से मिटाने वाले क्षुद्रग्रहों को नजरअंदाज नही किया जा सकता है। यही वजह है कि सौर विज्ञानियों की नजर इनकी गतिविधियों पर रहती है।

छोटे क्षुद्रग्रह वातावरण में जलकर नष्ट हो जाते है और कभी-कभी धरती से टकराकर खत्म होने का पता भी नहीं चलता। लेकिन बड़े क्षुद्रग्रहों से बड़ा खतरा हो सकता है। हालांकि वे विज्ञानियों की नजर में रहते हैं। अभी लगभग 400 मीटर आकार का क्षुद्रग्रह एपोफिस खतरनाक बना हुआ है। भविष्य में इसके पृथ्वी से टकराने की आशंका है इसीलिए यह निरंतर निगरानी में रहता है।

बेहद सक्रिय सूर्य के सौर कलंकों ने तोड़ा 23 साल का रिकार्ड

सूर्य में उभरे सौर कलंकों ने पिछले 23 वर्ष का रिकार्ड तोड़ डाला है। सूर्य की गतिविधियों पर एरीज के पूर्व कार्यवाहक निदेशक रहे व सौर विज्ञानी डा. वहाबउद्दीन लंबे समय से नजर रखे हुए हैं। उनका कहना है कि वर्तमान 25वां सौर चक्र जबरदस्त सौर तूफानों से गुजर रहा है। जिसने सेटेलाइट की निगरानी बढ़ाने को मजबूर कर दिया है।

अनेक बार कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट और दक्षिण प्रशांत, मध्य अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका में रंग-बिरंगी आसमानी रोशनी (अरोरा) के रिकार्ड नजारे देखने को मिल रहे हैं। अगस्त 2024 में औसत मासिक सनस्पाट संख्या 23 वर्षों में सर्वाधिक 200 के पार जा पहुंची है।

पूर्वानुमान की तुलना में यह संख्या दोगुनी से अधिक है। भू-चुम्बकीय सौर तूफानों से भारत में लेह लद्दाख भी अछूता नही रहा। यहां मई में रंगबिरंगी रोशनी का नजारा दिखा था।

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