April 5, 2025 6:34 pm

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हरियाली तीज मनाई जाएगी इन 3 शुभ योगों में, सही मुहूर्त में इस विधि से करेंगे पूजा तो पूरी होगी हर मनोकामना

हरियाली तीज का त्यौहार सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत में महिलाएं धूमधाम से मनाती हैं, साथ ही इस दिन व्रत भी रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियों का अंत होता है। इसके साथ ही हरियाली तीज का पर्व महिलाओं के सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। साल 2024 में 7 अगस्त के दिन हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाएगा। आइए जान लेते हैं कि इस दिन कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं और पूजा के लिए सही समय कब होगा।

हरियाली तीज पर बन रहे हैं ये शुभ योग 

हरियाली तीज के पावन त्योहार के दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं। इस दिन शिव योग के साथ ही परिघ और रवि योग भी रहेगा। रवि योग लगभग सुबह 8 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और अगले दिन की सुबह तक रहेगा। शिव योग भी सुबह से लेकर अगले दिन तक रहेगा। इन शुभ योगों में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से कई शुभ परिणाम आपको प्राप्त हो सकते हैं। आइए जानते हैं हरियाली तीज के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब है और किस विधि से इस दिन पूजा करनी चाहिए।

पूजा विधि और मुहूर्त 

हरियाली तीज के दिन सुबह 5 बजकर 30 मिनट से लेकर सुबह 9 बजे तक पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं शाम की पूजा का समय 7 बजे से लेकर 8 बजकर 30 मिनट तक होगा। आइए अब जान लेते हैं कि कैसा आपको इस दिन पूजा आराधना करनी चाहिए।

प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र इस दिन आपको धारण करने चाहिए। महिलाएं इस दिन हरे रंग के कपड़े पहन सकती हैं, क्योंकि यह रंग हरियाली तीज का प्रतीक माना जाता है। पूजा स्थल को साफ करें और भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियों को पूजा स्थल में स्थापित करें। पूजा की थाली में आपको रोली, मौली, चावल, फल, फूल, धूप, दीपक, मिठाई आदि रखनी चाहिए।

पूजन विधि

– सर्वप्रथम गणेश जी का स्मरण करते हुए उनकी पूजा आपको करनी चाहिए।
– इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा आपको आरंभ करनी चाहिए। माता पार्वती को रोली और चावल अर्पित करें।
– पूजने के दौरान आपको हरियाली तीज की कथा का पाठ करना चाहिए अगर पाठ न कर पाएं तो कथा को सुनें जरूर।
– इसके बाद माता पार्वती को चूड़ी, बिंदी और सिंदूर अर्पित करें साथ ही उन्हें सुहाग की सामग्री भी अर्पित करें।
– अंत में  भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और प्रसाद बांटें।
– व्रत का पारण रात को चंद्रमा दर्शन और पूजा के बाद किया जाता है। व्रत खोलने के लिए फलों और मिठाइयों का सेवन करें।

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